Ÿाीसगढ़ राज्य में ग्रामीण उद्यमिता विकास हेतु संचालित योजनाएँ

आशीष दुबे1 एवं  राजेश कुमार अग्रवाल2

1दुर्गा महाविद्यालय रायपुर

2गुरूकुल महिला महाविद्यालय, रायपुर (..)

 

 

प्रस्तावना

Ÿाीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य हैं, यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। राज्य की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि कार्य पर आश्रित हैं। गुजरात के बाद Ÿाीगसढ़ देश का दूसरा राज्य हैं जहाँ कृषि विकास की दर सबसे अधिक हैं। देश में औद्योगिक विकास के बाद भी अर्थव्यवस्था में कृषि का अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान हैं। देश के कुल रोजगार क्षेत्र में 80 से 85 प्रतिशत रोजगार के क्षेत्र कृषि उत्पादन एवं कृषि उत्पादन विपणन से संबंधित हैं।

 

Ÿाीसगढ़ का कृषि उत्पाद क्षेत्र पिछड़ा हुआ हैं जहाँ अभी भी संम्भावनाएँ विद्यमान हैं। प्रदेश में अधिकांश कृषि पंरपरागत तरीकों से किया जाता हैं, सिंचाई के क्षेत्र का विस्तार नहीं होने के कारण अधिकांश ग्रामीण कृषक खरीफ की फसल लेने के बाद अधिकांश कृषि रकबा 8 माह खाली पड़ा रहता है, इस अवधि में ग्रामीण बड़ी संख्या में रोजगार के लिए पलायन करते हैं। अतः आवश्यक है कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य के आधुनिकीकरण के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास किया जाय जिससे ग्रामीणों को वर्षभर पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध हो जाय।

 

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा हैं इन योजनाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तथा आय में वृद्धि हुई हैं। सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता के विकास के लिए संचालित प्रमुख योजनाएँ निम्नलिखित है-

 

एकीकृत दलहन तिलहन मक्का विकास कार्यक्रम इस कार्यक्रम का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण Ÿाीसगढ़ है। इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य दलहन, तिलहन तथा मक्का फसल के क्षेत्र एवं उत्पादन में वृद्धि करना हैं। इस योजना के अन्तर्गत सभी श्रेणी के किसान आते हैं। किन्तु सीमान्त, अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति तथा महिला कृषकों को प्राथमिकता दिया जाता है। इस योजना के अन्तर्गत कृषकों को बीज तथा कृषि यंत्रों के क्रय हेतु अनुदान प्रदान किया जाता हंै। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कृषकों को वरिष्ठ कृषि अधिकारी के माध्यम से उपसंचालक कृषि को आवेदन किया जाता हैं तथा जिला पंचायत की कृषि स्थाई समिति द्वारा कृषकों का चयन किया जाता हैं।

एकीकृत अनाज विकास कार्यक्रम- इस कार्य कार्यक्रम के अन्तर्गत धान, गेहुँ तथा गन्ना के उत्पादन में वृद्धि तथा विकास के लिए कार्यक्रम बनाएँ गए है। जिसमें धान के उत्पादन के विकास के लिए राज्य के 8 जिलों (महासमुंद, धमतरी, दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर, कांकेर, नारायणपुर तथा बीजापुर) गेहुँ के उत्पादन में वृद्धि के लिए राज्य के 10 जिलों तथा गन्ना विकास कार्यक्रम के लिए राज्य के 10 विभिन्न जिलों का चयन किया गया हैं।

 

 

,

 

इस योजना के अन्तर्गत सभी श्रेणी के कृषक शामिल हैं किन्तु लघु सीमान्त कृषकों अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के कृषकों तथा महिला कृषकों को प्राथमिकता दिया जाता हैं। इस योजना के अन्तर्गत चयनित कृषकों को उन्नत बीज,प्रशिक्षण,कृषि यंत्र तथा अनुदान प्रदान किया जाता हैं। उपरोक्त योजनाओं के अतिरिक्त प्रदेश के कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए कृषि यांत्रिकीकरण प्रोत्साहन योजना एकीकृत पोशक तत्व प्रबंधन तथा एकीकृत कीट प्रबंधन प्रोत्साहन योजना राष्ट्रीय जल संग्रहण विकास कार्यक्रम नदी घाटी एवं बाढ़ उन्मुख योजना,अक्ती बीज संवर्द्धन योजना, लघु सिंचाई योजना, किसान समृद्धि योजना, ग्रामीण लघु सिंचाई प्रबंधन योजना, गोबर कम्पोस्ट खाद तैयार करने का कार्यक्रम रामतिल उत्पादन प्रोत्साहन योजना तथा उद्यानिकी विभाग द्वारा फल,फूल,सब्जी,मसाले,औषधीय तथा सुगंधित फसलों की खेती से संबंधित अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा हैं। इन योजनाओं का ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम पड़ा हैं।

 

कृषि के अतिरिक्त सहायक क्षेत्रों के विकास के लिए भी राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा हैं। जिसमें मत्स्य पालन,पशुपालन एवं ग्रामोद्योग के विकास से संबंधित योजनाएँ प्रमुख हैं ग्रामीण क्षेत्रों में मछली उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा हैं जिनमें मत्स्य बीज उत्पादन,मत्स्योद्योग का विकास योजना मछुआरों को शिक्षण प्रशिक्षण योजना, पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों को ऋण अनुदान मत्स्य पालन प्रसार (झींगा पालन, मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन,नाव,जाल क्रय सुविधा योजना आदि प्रमुख हैं जिनका संचालन राज्य सरकार द्वारा मत्स्योद्योग विभाग के माध्यम से किया जाता हैं। इन योजनाओं का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राज्य हैं इन योजनाओं के माध्यम से हितग्राही पक्षों को विŸाीय सहायता एवं अन्य सहायता द्वारा मत्स्य उत्पादन के लिए अनेक सहयोग प्रदान किया जाता हैं इन योजनाओं के ग्रामीण रोजगार क्षेत्रों के विकास में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के माध्यम से रोजगार के निर्माण के लिए भी अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा हैं तथा सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्ध पशुधन के विकास के लिए Ÿाम किस्म के पशु उपलब्ध कराएँ जा रहे हैं।

 

राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामोद्योगों के विकास के लिए अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा हैं जिनमें ग्र्रामोद्योग (हाथकरधा) नवीन बुनाई प्रशिक्षण योजना,कबीर बुनकर पुरूस्कार योजना, उन्नत उपकरण प्रदाय योजना, एकीकृत हाथकरधा विकास योजना, महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना, बुनकर स्वास्थय बीमा योजना, अनुसंधान एवं विकास योजना, आदि को संचालन जिला हाथकरधा कार्यालय के माध्यम से किया जा रहा हैं। इन योजनाओं का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण Ÿाीसगढ़ हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनकर कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए Ÿाीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड का गठन किया गया हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अन्तर्गत रोजगार निर्माण एंव प्रोत्साहन के लिए कार्य करती हैं। इन सभी योजनाओं का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण Ÿाीसगढ़ हैं तथा इन योजनाओं के अन्तर्गत आर्थिक रूप से पिछड़े हुए सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा महिलाओं को सहायता प्रदान किया जाता हैं। Ÿाीसगढ़ खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा विभिन्न ग्रामोद्योगों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन भी किया जाता हैं जिसके अन्तर्गत सभी वर्ग के युवक-युवतियों को ग्रामोद्योगों से संबंधित ज्ञान एवं प्रशिक्षण दिया जाता हैं तथा विभिन्न माध्यमों से विŸाीय सहायता प्राप्त करने में सहयोग का उन्हें आत्म निर्भर बनाने में सहयोग किया जाता हैं। Ÿाीसगढ़ ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा बांस के कलात्मक वस्तुओं के निर्माण के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता हैं। बांस के कलात्मक वस्तुओं के निर्माण का प्रशिक्षण बोर्ड द्वारा बांस कला केन्द्र जगदलपुर में दिया जाता हैं तथा प्रशिक्षणार्थियों को बांस के कलात्मक वस्तुओं के निर्माण में कुशल बनाने के बाद उनके विपणन की व्यवस्था भी बोर्ड द्वारा किया जाता हैं तथा प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार तथा आर्थिक आधार प्रदान किया जाता है। प्रदेश में रेशम उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए पृथक रेशम प्रभाग की स्थापना की गयी है इस विभाग के द्वारा रेशम उत्पादन के लिए युवाओं को प्रशिक्षण,आर्थिक एवं अन्य सहायता उपलब्ध करायी जाती हैं। इस प्रकार स्पष्ट होता हैं कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता,सर्मृिद्ध तथा रोजगार से निर्माण के लिए राज्य सरकार के द्वारा अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा हैं। जिसके आंशिक परिणाम तो प्राप्त हो रहे हैं जो राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास तथा रोजगार के स्तर को ऊपर उठाने में सफल रहे हैं तथा भविष्य में इन योजनाओं से राज्य का आर्थिक विकास प्रभावशाली होगा।

 

संदर्भ ग्रन्थ

 

मनोरमा ईयर बुक

प्रतियोगिता दर्पण

भारतीय अर्थशास्त्र          -रूद्र Ÿ एवं सुन्दरम्

संदर्भ Ÿाीसगढ़

मितान -राहे विकास की -जनसंपर्क संचानालय, रायपुर

Ÿाीसगढ़ जनमन       -जनसंपर्क संचानालय, रायपुर

 

 

 

 

Received on 10.02.2012

Accepted on 10.03.2012     

© A&V Publication all right reserved

Research J.  Humanities and Social Sciences. 3(1): Jan- March, 2012, 90-91